जाने, क्या है रुद्राक्ष और इसकी महिमा रत्न
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रुद्राक्ष का अर्थ है - रूद्र का अक्ष , माना जाता है कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के अश्रुओं से हुई है. रुद्राक्ष को प्राचीन काल से आभूषण के रूप में, सुरक्षा के लिए, ग्रह शांति के लिए और आध्यात्मिक लाभ के लिए प्रयोग किया जाता रहा है.
रुद्राक्ष का लाभ अदभुत होता है और प्रभाव अचूक होता है।
रुद्राक्ष धारण करने के नियम क्या हैं ?
- रुद्राक्ष कलाई , कंठ और ह्रदय पर धारण किया जा सकता है. इसे कंठ प्रदेश तक धारण करना सर्वोत्तम होगा।
- कलाई में बारह,कंठ में छत्तीस और ह्रदय पर एक सौ आठ दानो को धारण करना चाहिए।
- एक दाना भी धारण कर सकते हैं पर यह दाना ह्रदय तकहोना चाहिए तथा लाल धागे में होना चाहिए।
- रुद्राक्ष धारण करने के पूर्व उसे शिव जी को समर्पित करना चाहिये तथा उसी माला या रुद्राक्ष पर मंत्र जाप करना चाहिए ।
विभिन्न रुद्राक्ष और उनका महत्व-
1.- एक मुखी रुद्राक्ष-
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| एक मुखी रुद्राक्ष |
एक मुखी रुद्राक्ष परम तत्व का प्रतीक है एक मुखी रुद्राक्ष साक्षात भगवान शंकर का स्वरूप है शास्त्रों के अनुसार जिस घर -परिवार में एक मुखी रुद्राक्ष की पूजा की जाती है उस घर में सुख शांति का वास होता है, इसका संचालक ग्रह सूर्य है। रत्न इसको धारण करने से अकाल मृत्यु , काल सर्प दोष, पितृदोष, श्रापित दोष जैसे दोषों का प्रभाव कम हो जाता है।
2.- दो मुखी रुद्राक्ष -
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| दो मुखी रुद्राक्ष |
दो मुखी रुद्राक्ष शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप द्वारा नियंत्रित हैं, दो मुखी रुद्राक्ष के धारण करने से पति-पत्नी में या परिवार में परस्पर श्रद्धा और विश्वास की प्राप्ति होती है तथा वे धन-धान्य और संतति संयुक्त होकर सफल गृहस्थ जीवन व्यतीत करने में सक्षम होते हैं। इसको धारण करने से गौ हत्या के पाप से मुक्ति मिलती है, पति-पत्नी में एकात्मय भाव उत्पन्न होता है।
3.- तीन मुखी रुद्राक्ष -
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| तीन मुखी रुद्राक्ष |
तीन मुखी रुद्राक्ष में त्रिदेव की शक्तियाँ समाहित होती है। हीन भावना ,आत्मग्लानि ,मानसिक तनाव से मुक्त करके सभी विद्याओं में निपुण करता है ।तीन मुखी रुद्राक्ष पहनने वाला व्यक्ति भी गलत जीवन जीने के कारण हुए पापों से मुक्त हो शुद्ध सात्विक जीवन की ओर लौट आता है। यह रुद्राक्ष अग्नि देवता के स्वामित्व में हैं।
4.- चार मुखी रुद्राक्ष -
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| चार मुखी रुद्राक्ष |
चार मुखी रुद्राक्ष चतुर्मुखी ब्रह्म का स्वरुप है। इस कारण से सृजन शक्ति की क्षमता प्राप्त होती है। इसके धारक को धर्म, अर्थ ,काम ,मोक्ष की प्राप्ति होती है। बुध ग्रह की बाधा को दूर करके मंदबुद्धि वालों को बुद्धिमान और दूरदर्शी बनाकर हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कराता है ।यह व्यापार नौकरी की समस्या का हल निकाल कर जीवन में खुशहाली लाता है ।यह समस्त पुरुषार्थ प्रदाता है इस रुद्राक्ष का नियंत्रण ग्रह बुध है।
5.- पांच मुखी-
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| पांच मुखी रुद्राक्ष |
पांच मुखी रुद्राक्ष कालाग्नि रूद्र रूप है। यह सबसे अधिक पाया जाता है और सबसे ज्यादा लाभदायक है। 108 दाने की माला खून के सभी विकारों को दूर करके निरोगी बनाती हैं तथा धारक को ब्लड प्रेशर, ह्रदय रोग या असाध्य बीमारी होने से बचाता है इस माला पर किसी भी देवी देवता का जाप शीघ्र फल देता है ,मानसिक उलझनों को दूर करके हृदय को शक्ति प्रदान करता है ।अध्यात्म में वृद्धि करके धार्मि ,आर्थिक, सामाजिक बाधाओं का निदान करता है,अर्थात सभी प्रकार की मनोकामना की पूर्ति करता है ।इसको प्रत्येक को धारण अवश्य करना चाहिए ।इस रुद्राक्ष का संचालक बृहस्पति है।
6.- छः मुखी रुद्राक्ष -
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| छः मुखी रुद्राक्ष |
छह मुखी रुद्राक्ष शिव पुत्र कार्तिकेय का स्वरूप होने से शत्रु विनाशक है ।धारक को विद्या, बुद्धि ,ज्ञान का विकास करने में शक्ति प्रदान करता है । इसको बच्चों को पहनाने से "याददाश्त" की वृद्धि होती है ,कंपटीशन में सफलता प्राप्त होती है। गले में टॉन्सिल नहीं होता। वाक् शक्ति और मधुर ध्वनि की प्राप्ति ,काम करने में एकाग्रता लाकर उत्साह प्रदान करता है । हीरे की तरह से जीवन में चमक आती है। बुरी संगत से भी बचाता है। इसके स्वामित्व कार्तिकेय हैं।
7.- सात मुखी रुद्राक्ष -
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| सात मुखी रुद्राक्ष |
सात मुखी रुद्राक्ष धारक पर सप्त ऋषियों की कृपा होती है । व्यसनों से मुक्ति दिलाकर हर प्रकार की आर्थिक बाधा, डूबा हुआ, धन मुकदमे में विजय, आदि सांसारिक क्षेत्र में सफलता दिलाता है। नौकरी और व्यापार की बाधाओं को दूर करके विकास के पथ पर ले जाने में सक्षम है। विदेश यात्रा कराता है। शनि ग्रह की बाधाओं को दूर करके धन -धान्य वैभव प्रदान कराके समृद्धिशाली बनाता है। सुखी जीवन जीने की कला का विकास होता है। सात मुखी रुद्राक्ष की स्वामिनी महालक्ष्मी है, इसका संचालक ग्रह शनि है।
8.- आठ मुखी रुद्राक्ष -
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| आठ मुखी रुद्राक्ष |
आठ मुखी रुद्राक्ष अष्ट भैरव स्वरूप होने से सभी प्रकार के आघातों का रक्षक माना जाता है । धारक पर किए गए हमले को विफल करने में सक्षम है। इसका धारक दैविक और दैहिक कष्टों से मुक्त रहता है। सच्चे मित्रों की पहचान करा कर द्वैष और विरोध रखने वालों के विचार बदलता है। राहु ग्रह का प्रिय होने के कारण कार्य में होने वाले विलंब को कम करता है। आठ मुखी रुद्राक्ष के अधिपति देवता श्री गणेश जी हैं। इस रुद्राक्ष का संचालक ग्रह राहु है।
9.- नौ मुखी रुद्राक्ष -
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| नौ मुखी रुद्रा |
नव मुखी रुद्राक्ष नवदुर्गा का स्वरूप होने से नव ग्रहों की पीड़ा से मुक्ति दिलाकर धारक में सहनशीलता, कर्मठता और संकल्प में दृढ़ता लाकर मां की कृपा प्राप्त कराता है। साधना में स्थिर करके मुकदमे में विजय दिलाने की क्षमता प्रदान कराता है। मां दुर्गा की आराधना में प्रयोग करने पर शक्तिपुंज शुरू होकर धारक को अद्भुत क्षमता प्रदान करता है। इससे सभी कष्टों का निवारण होता है । इसका संचालक ग्रह केतु है। अधिपति देवता भैरव जी हैं।
10.दस मुखी रुद्राक्ष-
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| दस मुखी रुद्राक्ष |
दसमुखी रुद्राक्ष विष्णु का स्वरूप होने से दसों दिशाओं में धारक को माँ लक्ष्मी का वरदान प्राप्त होता है। राजनीतिक क्षेत्रों में सफलता दिलाकर प्रतिष्ठा बढ़ाता है। यह अकाल मृत्यु हारी और कष्ट निवारक है।दसमुखी रुद्राक्ष के प्रभाव से लक्ष्मी की विशेष कृपा होती है और परिवार फलता फूलता और संपन्न रहता है इसके अधिपति भगवान विष्णु हैं।
11. ग्यारह मुखी-
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| ग्यारह मुखी रुद्राक्ष |
ग्यारह मुखी रुद्राक्ष रूद्र स्वरूप है, शत्रु विनाशक है। सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है। शरीर बलिष्ठ और निरोगी होता है, धारक पराजित नहीं होता है। ध्यान में एकाग्रता लाता है। इसी ग्रह का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है। ग्यारह मुखी रुद्राक्ष के अधिपति देवता श्री हनुमान जी हैं।
12.बारहमुखी रुद्राक्ष-
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| बारह मुखी रुद्राक्ष |
बारहमुखी रुद्राक्ष भगवान सूर्य के ओज और तेज का प्रतिरूप है सूर्य की कृपा से शरीर में तेजस्विता आने के कारण व्यक्तित्व प्रभावशाली होता है। खून को फिल्टर करके हृदय रोग से छुटकारा दिलाता है। दूसरों को प्रभावित करके भाग्योदय प्राप्त कराता है और प्रभुत्व की प्राप्ति होती है। धन, धान्य ,वैभव, ऐश्वर्य की वृद्धि होती है। इस रुद्राक्ष के धारण से व्यक्तित्व नेतृत्व और शासक का पद प्राप्त करता है।
13.तेरह मुखी रुद्राक्ष-
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| तेरह मुखी रुद्राक्ष |
तेरह मुखी रुद्राक्ष मस्तिष्क को शक्ति प्रदान करता है। इंद्र के समान वैभव और कामदेव के समान प्रभाव से सभी को वश में करता है। प्रशासनिक क्षमता प्राप्त होती है। राजनीति क्षेत्र में उच्च पद प्राप्त कराकर अष्टसिद्धि को प्रदान कराता है। धारक की सभी कामनाओं की पूर्ति करता है। धारक राज्य सुख वैभव और ऐश्वर्य को प्राप्त करके सुख भोगता है धारक को जंगली जानवरों लुटेरों रोग आदि का भय नहीं रहता है अधिपति इंद्र देवता है
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| चौदह मुखी रुद्राक्ष |
14.चौदह मुखी रुद्राक्ष-
चौदह मुखी रुद्राक्ष मृत्युंजय का स्वरूप होने से मुक्त रोगों का नाश शक है असाध्य रोगों में रामबाण है बाधाओं को दूर करके हानी चिंता दुर्घटना एवं हर प्रकार के असाध्य रोगों से मुक्ति दिलाकर सुरक्षा समृद्धि प्रदान कराता है यह रुद्राक्ष अति दुर्लभ और प्रभावशाली है भविष्य में आने वाली बाधाओं की प्रतीति स्वयं हो जाती है किसी भी विषय पर लिया गया निर्णय सफल होता है वंश का उद्धार करके सिद्धियां प्रदान कराता है अधिपति देवता हनुमान जी हैं
गौरी शंकर रुद्राक्ष-
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| गौरी शंकर रुद्राक्ष |
गौरी शंकर रुद्राक्ष शिव पार्वती का प्रतीक है। इस रुद्राक्ष के धारण से पति-पत्नी एकात्म भाव होता है, परिवार की सुख शांति के लिए गौरी शंकर रुद्राक्ष को श्रेष्ठ माना गया है। यह सही जीवनसाथी का चयन, विवाह योग के लिए श्रेष्ठ माना गया है। यह चंद्र ग्रह के दुष्प्रभाव को दूर कर धारक को सही निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है। इससे अटूट भक्ति और श्रेष्ठ ध्यान के लिए गौरी शंकर रुद्राक्ष को पहना जाता है। वैवाहिक जीवन के मतभेद को दूर करता है।
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| गणेश रुद्राक्ष |
गणेश रुद्राक्ष -
गणेश रुद्राक्ष श्री गणेश जी की आकृति के लिए, इस रुद्राक्ष पर सूंढ़ के सामान एक उभार होता है। इसे धारण करने से रिद्धि सिद्धि प्राप्त होती हैं एवं कलश कितने नष्ट होते हैं। गणेश रुद्राक्ष हर कार्य में सफलता प्रदान करता है।
सरस्वती बंध -
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| सरस्वती बंध रुद्राक्ष |
सरस्वती बंध खासतौर पर विद्यार्थियों के लिए तैयार किया गया है। यह बंध मानसिक शक्ति एकाग्रता, बुद्धिमत्ता एवं ध्यान को बढ़ाता है। इसके मात्र धारण करने से प्रवीणता,अभ्यास एवं ज्ञान प्राप्त होता है। इस बंध को गले या कलाई में पहन सकते हैं। इस बंध में दो -चार मुखी एवं एक छः मुखी रुद्राक्ष होते हैं।